Maharashtra सरकार ने Bombay HC में public security law का किया बचाव, राज्य में 64 Maoist front संगठन होने का दावा
Maharashtra सरकार ने Special Public Security Act, 2025 के खिलाफ Congress और CPI की याचिकाएं खारिज करने की मांग की है। Bombay High Court में दाखिल हलफनामे में राज्य ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा 64 Maoist front संगठन यहीं हैं।

Public security law पर अदालत में आमने-सामने सरकार और विपक्ष
मुंबई, 6 अक्टूबर 2026: Maharashtra सरकार ने Bombay High Court में Maharashtra Special Public Security Act, 2025 का जोरदार बचाव किया है। राज्य के Home Department ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर Congress और Communist Party of India (CPI) की उन याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है, जिनमें इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
सरकार ने Union Home Ministry के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि Maharashtra में देश के सबसे ज्यादा, यानी 64 Maoist front संगठन सक्रिय हैं।
किन राज्यों से की गई तुलना
हलफनामे में दूसरे Maoist प्रभावित राज्यों के आंकड़े भी रखे गए। सरकार के मुताबिक Telangana में 29, Andhra Pradesh में 19, Jharkhand में 14, Chhattisgarh में 11 और Odisha में 7 Maoist front संगठन चिन्हित हैं।
- Maharashtra: 64 संगठन
- Telangana: 29 संगठन, जिनमें 7 पर प्रतिबंध
- Andhra Pradesh: 19 संगठन, जिनमें 7 पर प्रतिबंध
- Jharkhand, Chhattisgarh और Odisha: सूचीबद्ध सभी संगठनों पर प्रतिबंध
सरकार ने तर्क दिया कि राज्य की बड़ी शहरी आबादी के कारण Maharashtra urban Maoist नेटवर्क का केंद्र बन गया, जबकि पड़ोसी राज्यों की तरह यहां ऐसे संगठनों पर रोक के लिए पहले कोई खास public security law नहीं था।
विपक्ष की आपत्ति क्या है
Congress और CPI का कहना है कि यह कानून जरूरत से ज्यादा व्यापक और मनमाना है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार इससे executive को संगठनों पर प्रतिबंध लगाने और संपत्ति कुर्क करने के व्यापक अधिकार मिल जाते हैं, जबकि इन पर पर्याप्त न्यायिक निगरानी नहीं है।
विधानसभा ने यह कानून जुलाई 2025 में पारित किया था और दिसंबर 2025 में इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी।
सरकार ने गिनाए सुरक्षा उपाय
राज्य ने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों को गलत बताया और कहा कि कानून नागरिकों की स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के दायित्व के बीच संतुलन रखता है। बिना जन परामर्श के कानून पास करने के आरोप पर सरकार ने कहा कि एक संयुक्त समिति ने 15,000 से ज्यादा लिखित आपत्तियों की समीक्षा की और उसके बाद अहम शब्दों में बदलाव कर कानूनी सुरक्षा उपाय जोड़े गए।
हलफनामे में 2020 के केंद्रीय ढांचे का भी जिक्र है, जिसका मकसद funding रोककर और front संगठनों पर प्रतिबंध लगाकर urban Maoist नेटवर्क पर लगाम लगाना है। सरकार के मुताबिक Security Related Expenditure योजना में शामिल होने के लिए भी ऐसा कानून जरूरी है।
सरकार ने कहा कि कोई व्यक्ति सिर्फ जिज्ञासा या अकादमिक अभ्यास के लिए किसी कानून की वैधता को चुनौती नहीं दे सकता, उसके पास वास्तविक शिकायत और कानूनी नुकसान होना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं के अधिकार पर सवाल
राज्य ने यह भी दलील दी कि Congress और CPI यह नहीं दिखा पाए हैं कि उन्हें इस कानून से कोई विशेष शिकायत या कानूनी नुकसान हुआ है। इसी आधार पर सरकार ने याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है।
आगे क्या
अब Bombay High Court में याचिकाकर्ता सरकार के हलफनामे पर अपना जवाब दे सकते हैं, जिसके बाद अदालत कानून की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई आगे बढ़ाएगी। फैसले का असर इस बात पर पड़ेगा कि राज्य सरकार संगठनों पर प्रतिबंध और संपत्ति कुर्की जैसे अधिकारों का कितना इस्तेमाल कर पाएगी।
Frequently asked questions
Maharashtra Special Public Security Act कब पारित हुआ?
विधानसभा ने इसे जुलाई 2025 में पारित किया और दिसंबर 2025 में इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली।
इस कानून को किसने चुनौती दी है?
Congress और Communist Party of India (CPI) ने Bombay High Court में याचिकाएं दायर कर इसकी संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है।
सरकार ने Maoist front संगठनों के बारे में क्या दावा किया?
Union Home Ministry के आंकड़ों के हवाले से सरकार ने कहा कि Maharashtra में देश के सबसे ज्यादा 64 Maoist front संगठन हैं।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है?
उनका कहना है कि कानून बहुत व्यापक और मनमाना है और executive को बिना पर्याप्त न्यायिक निगरानी के संगठनों पर प्रतिबंध व संपत्ति कुर्की के अधिकार देता है।
जन परामर्श के आरोप पर सरकार ने क्या कहा?
सरकार के अनुसार संयुक्त समिति ने 15,000 से ज्यादा लिखित आपत्तियों की समीक्षा के बाद कानून में बदलाव कर सुरक्षा उपाय जोड़े।
Sources
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