सारण में बाढ़ का कहर जारी, 6 प्रखंडों के 236 गांव प्रभावित; 4.60 लाख लोगों पर असर, NH-722 अब भी पानी में
बिहार के सारण (छपरा) जिले में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन 6 प्रखंडों की 42 पंचायतों के 236 गांव अब भी प्रभावित हैं। करीब 4.60 लाख आबादी पर असर पड़ा है और 128 नावों से राहत कार्य चल रहा है।

सारण में बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त
छपरा, 6 अक्टूबर 2026: बिहार के सारण जिले में बाढ़ का पानी कुछ इलाकों में उतरने लगा है, लेकिन हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार जिले के 6 प्रखंडों की 42 पंचायतों के 236 गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं।
कई गांवों की सड़कें कट चुकी हैं और दर्जनों घर ढह गए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में जलस्तर घटा है, पर प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम लगातार जारी है।
लाखों लोगों की जिंदगी पर असर
बाढ़ का दायरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा प्रभावित आबादी के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। प्रशासन के अनुमान के मुताबिक 1 लाख से अधिक परिवारों का रोजमर्रा का जीवन इस बाढ़ से सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है। खेतों, घरों और रास्तों में पानी भरने से लोगों की आवाजाही और कामकाज दोनों पर असर पड़ा है।
NH-722 पर अब भी पानी
मकेर इलाके में Muzaffarpur-Chhapra को जोड़ने वाले NH-722 पर अब भी करीब आधा फीट पानी जमा है। इससे इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित है और आसपास के गांवों का संपर्क भी कमजोर पड़ा है।
ग्रामीण सड़कों के कटने से कई गांवों तक पहुंचने के लिए नावें ही मुख्य सहारा बनी हुई हैं। प्रशासन के मुताबिक आवागमन और राहत-बचाव के लिए 128 नावें चलाई जा रही हैं।
74 हजार से ज्यादा लोगों ने छोड़ा घर
बाढ़ के कारण करीब 74,737 लोग प्रभावित क्षेत्रों से निकलकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे हैं। इनमें से जो लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं, उनके लिए जरूरी सामान उपलब्ध कराने की बात प्रशासन ने कही है।
प्रभावित इलाकों में अब तक 55,718 पॉलीथिन शीट बांटी जा चुकी हैं, ताकि जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं उन्हें अस्थायी छत मिल सके।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार 133 सामुदायिक रसोई के जरिए अब तक 4 लाख 51 हजार 538 लोगों को भोजन दिया गया है।
स्वास्थ्य और पशुओं के लिए इंतजाम
बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 54 चिकित्सा शिविर लगाए हैं, जहां अब तक 14,012 मरीजों का इलाज किया गया है।
संक्रमण और महामारी जैसी स्थिति से बचाव के लिए प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। पशुओं के लिए चारे और इलाज की व्यवस्था भी की गई है।
बच्चों के पोषण पर भी ध्यान
प्रभावित पंचायतों में बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के लिए 254 आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं। पेयजल, खाद्यान्न आपूर्ति और पशु चिकित्सा जैसी सेवाएं भी लगातार जारी रखने की बात प्रशासन ने कही है।
- 6 प्रखंड, 42 पंचायत और 236 गांव बाढ़ प्रभावित।
- करीब 4.60 लाख आबादी और 1 लाख से अधिक परिवारों पर असर।
- 74,737 लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे।
- 128 नावें, 133 सामुदायिक रसोई और 54 चिकित्सा शिविर सक्रिय।
- NH-722 पर मकेर में अब भी करीब आधा फीट पानी।
आगे क्या
जिला प्रशासन ने कहा है कि राहत, बचाव, स्वास्थ्य, पेयजल और खाद्यान्न आपूर्ति की सेवाएं जारी रहेंगी। पानी उतरने के साथ ही कटे हुए रास्तों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त घरों का आकलन और विस्थापित परिवारों की घर वापसी प्रशासन के सामने अगली बड़ी चुनौती होगी।
NH-722 पर जलस्तर कम होने के बाद ही Muzaffarpur-Chhapra मार्ग पर यातायात पूरी तरह सामान्य हो पाएगा।
Frequently asked questions
सारण में बाढ़ से कितने गांव प्रभावित हैं?
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार 6 प्रखंडों की 42 पंचायतों के 236 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।
बाढ़ से कितनी आबादी पर असर पड़ा है?
अनुमान के मुताबिक करीब 4 लाख 60 हजार 963 लोग और 1 लाख से अधिक परिवार प्रभावित हैं।
NH-722 की क्या स्थिति है?
मकेर इलाके में Muzaffarpur-Chhapra NH-722 पर अब भी करीब आधा फीट पानी है।
राहत के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं?
128 नावें, 133 सामुदायिक रसोई, 54 चिकित्सा शिविर और 254 आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं; 55,718 पॉलीथिन शीट भी बांटी गई हैं।
कितने लोगों ने पलायन किया है?
करीब 74,737 लोग प्रभावित इलाकों से निकलकर सुरक्षित स्थानों पर रह रहे हैं।
Sources
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