Law students की attendance पर Supreme Court ने फैसला सुरक्षित रखा, BCI और NMIMS ने दी है Delhi HC के आदेश को चुनौती
Supreme Court ने Delhi High Court के उस फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर निर्णय सुरक्षित रख लिया, जिसमें कहा गया था कि सिर्फ कम attendance के आधार पर law students को परीक्षा से नहीं रोका जा सकता।

Attendance विवाद पर Supreme Court में सुनवाई पूरी
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2026: Supreme Court ने मंगलवार को law students के लिए अनिवार्य attendance से जुड़े Delhi High Court के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। Justice Vikram Nath, Justice Sandeep Mehta और Justice Augustine George Masih की bench ने मामले की सुनवाई की।
ये याचिकाएं Bar Council of India (BCI) और Narsee Monjee Institute of Management Studies (NMIMS) ने दायर की हैं। Delhi High Court ने नवंबर 2025 में कहा था कि केवल attendance की कमी के आधार पर law students को परीक्षा देने या आगे की पढ़ाई से नहीं रोका जा सकता।
Delhi High Court ने क्या कहा था
High Court का यह फैसला 2016 में Amity Law School, Delhi के एक छात्र की आत्महत्या के बाद शुरू हुई suo motu कार्यवाही में आया था। अदालत ने कहा था कि legal education में attendance की शर्तें इतनी सख्ती से लागू नहीं की जा सकतीं कि वे मानसिक आघात या आत्महत्या जैसे गंभीर परिणामों की वजह बनें।
High Court ने यह भी कहा था कि संस्थान BCI द्वारा तय न्यूनतम प्रतिशत से ज्यादा attendance की शर्त नहीं रख सकते। अदालत के अनुसार legal education केवल classroom तक सीमित नहीं है, बल्कि moot court, seminar, court hearings और legal aid clinics भी इसका हिस्सा हैं।
अंतरिम व्यवस्था के निर्देश
High Court ने BCI को छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से परामर्श के बाद तीन साल और पांच साल के LL.B. courses के attendance नियमों पर दोबारा विचार करने को कहा था। तब तक के लिए एक अंतरिम व्यवस्था भी तय की गई थी।
- कॉलेज छात्रों को नियमित रूप से उनकी attendance की जानकारी दें और कमी होने पर अभिभावकों को बताएं।
- कमी पूरी करने के लिए अतिरिक्त physical या online classes और assignments कराए जाएं।
- Semester के अंत में attendance कम होने पर भी छात्र परीक्षा दे सकेगा, लेकिन अंकों में अधिकतम 5% या CGPA में 0.33% तक कटौती हो सकती है।
- केवल attendance की कमी के आधार पर अगले semester में promotion नहीं रोका जा सकता।
Supreme Court ने पहले जताई थी आपत्ति
7 मई को एक अन्य सुनवाई के दौरान Justice Vikram Nath ने टिप्पणी की थी कि इस फैसले से "chaos" पैदा हुआ है और यह National Law Universities के लिए गंभीर चिंता बन गया है। इसके बाद BCI ने फैसले को Supreme Court में चुनौती दी।
13 मई को NMIMS की याचिका पर सुनवाई के दौरान Justice Sandeep Mehta ने कहा था कि इस फैसले से NLU hostels केवल रहने-खाने की जगह बनकर रह सकते हैं। 26 मई को अदालत ने High Court फैसले के paragraph 249 पर रोक लगा दी थी, जिसमें attendance की कमी पर छात्रों को रोकने से मना किया गया था। जुलाई में Supreme Court ने छात्रों को एक बार की राहत (one-time protection) भी दी थी।
Justice Sandeep Mehta ने सुनवाई के दौरान आशंका जताई थी कि छात्र High Court के फैसले को classes में न आने का "free pass" मान सकते हैं।
आगे क्या
Supreme Court अब सुरक्षित रखा गया फैसला बाद में सुनाएगा। इसमें तय होगा कि Delhi High Court के निर्देश बरकरार रहेंगे या BCI और संस्थानों को attendance के सख्त नियम लागू करने की छूट मिलेगी। तब तक paragraph 249 पर लगी रोक जारी है।
Frequently asked questions
Supreme Court ने किस मामले में फैसला सुरक्षित रखा?
Law students की अनिवार्य attendance पर Delhi High Court के नवंबर 2025 के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर।
याचिकाएं किसने दायर की हैं?
Bar Council of India (BCI) और NMIMS ने High Court के फैसले को चुनौती दी है।
Delhi High Court ने क्या कहा था?
केवल attendance की कमी के आधार पर law students को परीक्षा देने या आगे पढ़ाई से नहीं रोका जा सकता।
क्या High Court के फैसले पर रोक है?
हां, Supreme Court ने 26 मई को फैसले के paragraph 249 पर रोक लगाई थी।
मामले की सुनवाई किस bench ने की?
Justice Vikram Nath, Justice Sandeep Mehta और Justice Augustine George Masih की bench ने।
Sources
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