पितृपक्ष के आखिरी दिन: इंदिरा एकादशी का पारण 7 अक्टूबर सुबह, सर्वपितृ अमावस्या 10 को; 11 अक्टूबर से Navratri
पंचांग गणनाओं के अनुसार इंदिरा एकादशी का पारण 7 अक्टूबर को सुबह 6:17 से 8:38 बजे तक होगा। सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को है और 11 अक्टूबर को घटस्थापना के साथ शारदीय Navratri शुरू होंगे।

पितृपक्ष अंतिम चरण में
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2026: आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में चल रहा पितृपक्ष अब अपने अंतिम चरण में है। मंगलवार को श्रद्धालुओं ने इंदिरा एकादशी का व्रत रखा, जिसका पारण बुधवार सुबह होगा। इसके बाद 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष संपन्न होगा और 11 अक्टूबर से शारदीय Navratri की शुरुआत होगी।
यहां दी गई तिथियां और मुहूर्त प्रकाशित पंचांग गणनाओं और ज्योतिषियों के हवाले से हैं। स्थानीय सूर्योदय के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
इंदिरा एकादशी पारण का समय
ABP Live में प्रकाशित पंचांग गणना के अनुसार पारण का शुभ समय 7 अक्टूबर को सुबह 06:17 से 08:38 बजे तक रहेगा, यानी श्रद्धालुओं को करीब 2 घंटे 21 मिनट मिलेंगे। द्वादशी तिथि उस दिन रात 11:16 बजे तक रहेगी।
मान्यता है कि द्वादशी तिथि की पहली एक-चौथाई अवधि, जिसे हरिवासर कहा जाता है, में व्रत नहीं खोलना चाहिए। गणना के अनुसार इस बार हरिवासर सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा, इसलिए सूर्योदय के साथ पारण का समय शुरू हो जाएगा।
पारण से जुड़ी मान्यताएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पारण से पहले स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और तुलसी दल व चरणामृत ग्रहण किया जाता है। एकादशी पर चावल वर्जित माना जाता है, जबकि द्वादशी के पारण में सात्विक भोजन के साथ चावल शामिल करने की परंपरा है।
चूंकि यह एकादशी पितृपक्ष में आती है, इसलिए पारण से पहले गाय के लिए पहला ग्रास निकालने और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा भी बताई गई है।
मान्यता के अनुसार एकादशी व्रत का पूरा फल तभी मिलता है, जब पारण सही समय और नियम से किया जाए।
सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को
Hindustan Times में प्रकाशित लेख में ज्योतिषी Sidhharrth S Kumaar के हवाले से बताया गया है कि 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को है। यह पितृपक्ष की अंतिम अमावस्या होती है और इस दिन पूरे पितृ वंश का स्मरण किया जाता है।
परंपरा के अनुसार जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, या जो तय तिथि पर श्राद्ध-तर्पण नहीं कर सके, वे इस दिन तर्पण और दान कर सकते हैं।
- तर्पण में देव तर्पण, ऋषि तर्पण और पितृ तर्पण का क्रम बताया गया है।
- पितृ तर्पण दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल मिले जल से किया जाता है।
- तर्पण के बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र या जरूरी सामान का दान करने की परंपरा है।
11 अक्टूबर से Navratri
Times of India में प्रकाशित पंचांग विवरण के अनुसार प्रतिपदा तिथि भारतीय समय से 10 अक्टूबर रात 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर रात 9:30 बजे तक रहेगी। सूर्योदय के समय प्रतिपदा 11 अक्टूबर को होने से Navratri का पहला दिन और घटस्थापना रविवार, 11 अक्टूबर को होगी।
उसी विवरण के अनुसार Delhi पंचांग में अष्टमी और नवमी दोनों 19 अक्टूबर को पड़ रही हैं।
आगे क्या
7 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी का पारण, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या और 11 अक्टूबर को घटस्थापना के साथ त्योहारों का नया दौर शुरू होगा। सटीक मुहूर्त के लिए अपने शहर के पंचांग या स्थानीय पुरोहित से पुष्टि करना उचित रहेगा।
यह जानकारी प्रकाशित पंचांग गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।
Frequently asked questions
इंदिरा एकादशी का पारण कब है?
प्रकाशित पंचांग गणना के अनुसार 7 अक्टूबर 2026 को सुबह 6:17 से 8:38 बजे तक।
हरिवासर क्या होता है?
द्वादशी तिथि की पहली एक-चौथाई अवधि को हरिवासर कहते हैं, जिसमें व्रत खोलना वर्जित माना जाता है।
सर्वपितृ अमावस्या 2026 कब है?
ज्योतिषी Sidhharrth S Kumaar के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को है।
Navratri 2026 कब से शुरू होंगे?
पंचांग विवरण के अनुसार घटस्थापना और Navratri का पहला दिन रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को है।
Navratri में अष्टमी और नवमी कब हैं?
Delhi पंचांग के अनुसार अष्टमी और नवमी दोनों 19 अक्टूबर को पड़ रही हैं।
Sources
- ABP Live — इंदिरा एकादशी का पारण कल सुबह 6:17 से 8:38 बजे तक, क्या खाकर खोलें व्रत?
- Hindustan Times — Sarva Pitru Amavasya 2026: Date, tarpan vidhi, significance and what to do if you missed your ancestor’s shraddha tithi
- Times of India — Navratri 2026: Start End Date, and Muhurat in the USA, UK, Canada and Australia
- Photo: File:Ganga Aarti at Dashashwamedh Ghat Varanasi 40.jpg — Goutam1962, CC BY-SA 4.0 (Wikimedia Commons)
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