Uttarakhand के 27 लाख बिजली उपभोक्ताओं को राहत, नियामक आयोग ने UPCL का 5,900 करोड़ का दावा खारिज किया
Uttarakhand Electricity Regulatory Commission ने UP से संपत्ति-देनदारी बंटवारे से जुड़ा UPCL का करीब 5,900 करोड़ रुपये का दावा खारिज कर केवल 389.33 करोड़ रुपये मंजूर किए। फिलहाल बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।

UPCL के दावे पर आयोग का बड़ा फैसला
देहरादून, 6 अक्टूबर 2026: Uttarakhand Electricity Regulatory Commission (UERC) ने राज्य के करीब 27 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। आयोग ने Uttarakhand Power Corporation Limited (UPCL) के उस करीब 5,900 करोड़ रुपये के दावे को खारिज कर दिया, जो उत्तर प्रदेश से परिसंपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे से जुड़ा था।
आयोग ने इसमें से केवल 389.33 करोड़ रुपये को मंजूरी दी है। आयोग ने यह भी साफ किया है कि फिलहाल बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही है।
84% हिस्सा सिर्फ ब्याज
आयोग के आकलन के मुताबिक UPCL के कुल दावे में असली रकम केवल 936.37 करोड़ रुपये की थी। बाकी करीब 4,963.65 करोड़ रुपये वर्षों की देरी पर चक्रवृद्धि ब्याज यानी carrying cost के रूप में मांगे गए थे, जो पूरे दावे का लगभग 84 प्रतिशत है।
आयोग ने carrying cost को शून्य माना। केंद्र सरकार के उपक्रमों के करीब 572 करोड़ रुपये के बकाए को राज्य सरकार की ओर से शेयर पूंजी में बदलने के आधार पर मांगा गया रिटर्न भी खारिज कर दिया गया।
मंजूर रकम का ब्योरा
- Depreciation: 288.70 करोड़ रुपये
- Reasonable return: 97.75 करोड़ रुपये
- Working capital पर ब्याज: 2.88 करोड़ रुपये
- Carrying cost: शून्य
देरी पर आयोग की तीखी टिप्पणी
आयोग के अध्यक्ष ML Prasad, सदस्य (विधि) Anurag Sharma और सदस्य (तकनीकी) Prabhat Kishore Dimri ने इस मामले में पहले जनसुनवाई की थी। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि 2003 में transfer scheme बनने के बाद UPCL वर्षों तक फाइल पर बैठा रहा।
2013 के बाद छह साल तक इस मामले में कोई पत्राचार नहीं हुआ। 2022 में अधिसूचना जारी होने के बाद भी मामला चार साल बाद 2026 में आयोग तक पहुंचा।
आयोग ने साफ कहा कि निगम और शासन के ढुलमुल रवैये और प्रशासनिक देरी का बोझ राज्य के उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता।
मामला क्या है?
साल 2000 में उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन से Uttarakhand अलग राज्य बना था। इसके बाद बिजली क्षेत्र की परिसंपत्तियों और देनदारियों का बंटवारा होना था। UPCL इसी बंटवारे के आधार पर अपने हिस्से की रकम की भरपाई चाहता था, जिसे वह आगे चलकर tariff के जरिए वसूल सकता था।
अगर पूरा दावा मंजूर होता, तो इसका असर आने वाले वर्षों में उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर पड़ सकता था। आयोग के फैसले से यह आशंका काफी हद तक खत्म हो गई है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने?
इस फैसले का सीधा फायदा राज्य के घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा। मंजूर रकम भी अगर tariff में आती है, तो उसे एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से जोड़ने पर विचार होगा। आयोग का रुख यह संदेश भी देता है कि प्रशासनिक देरी की कीमत उपभोक्ताओं से नहीं वसूली जाएगी।
आगे क्या
आयोग ने सुझाव दिया है कि अगर राज्य सरकार चाहे तो मंजूर 389.33 करोड़ रुपये को UPCL की उन देनदारियों के साथ समायोजित कर सकती है, जो निगम को सरकार को चुकानी हैं। ऐसा न होने पर इस रकम को आगामी tariff प्रस्तावों में चरणबद्ध तरीके से शामिल करने पर विचार होगा, ताकि उपभोक्ताओं पर एकमुश्त बोझ न पड़े। अब सरकार और UPCL के अगले कदम पर नजर रहेगी।
Frequently asked questions
UERC ने UPCL का कितना दावा खारिज किया?
UPCL ने करीब 5,900 करोड़ रुपये का दावा किया था, जिसमें से आयोग ने केवल 389.33 करोड़ रुपये मंजूर किए।
यह दावा किस बारे में था?
यह दावा उत्तर प्रदेश से Uttarakhand के अलग होने के बाद बिजली क्षेत्र की परिसंपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे से जुड़ा था।
दावे का बड़ा हिस्सा क्यों खारिज हुआ?
आयोग के मुताबिक करीब 4,963.65 करोड़ रुपये सिर्फ वर्षों की देरी पर मांगा गया चक्रवृद्धि ब्याज (carrying cost) था।
क्या बिजली दरें बढ़ेंगी?
आयोग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही है।
मंजूर 389.33 करोड़ रुपये का क्या होगा?
यह रकम राज्य सरकार UPCL की देनदारियों से समायोजित कर सकती है, वरना इसे आगामी tariff प्रस्तावों में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जा सकता है।
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