Japan MMX Mission: मंगल के चांद Phobos की मिट्टी लाने निकला जापान का यान, H3 रॉकेट से सफल लॉन्च; 2031 में धरती पर लौटेगा, ऐसा करने वाला दुनिया का पहला मिशन
जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA ने 20 अक्टूबर को H3 रॉकेट से MMX (Martian Moons eXploration) यान लॉन्च किया। यह अगस्त 2027 में मंगल पहुंचेगा, उसके चांद Phobos से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी उठाएगा और 2031 में धरती पर लौटेगा। कामयाब हुआ तो यह मंगल के किसी चांद से नमूने लाने वाला और Mars system की round trip करने वाला दुनिया का पहला मिशन होगा।

मंगल के चांद की मिट्टी लाने निकला जापान का MMX, पहली बार होगी Mars system की 'round trip'
टोक्यो, 22 अक्टूबर 2026: जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA ने मंगल ग्रह के चांद Phobos (फोबोस) से मिट्टी लाने वाला अपना ऐतिहासिक मिशन MMX (Martian Moons eXploration) सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। H3 रॉकेट (फ्लाइट नंबर 10) ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को जापानी समय सुबह 4:41:03 बजे (भारतीय समय रात करीब 1:11 बजे) Tanegashima Space Center से उड़ान भरी। JAXA के मुताबिक उड़ान के करीब 71 मिनट 13 सेकंड बाद MMX यान रॉकेट से अलग हुआ और तय कक्षा में पहुंच गया।
अगर यह मिशन कामयाब रहा, तो यह मंगल के किसी चांद से नमूने धरती पर लाने वाला दुनिया का पहला मिशन होगा। साथ ही यह इंसान की बनाई पहली ऐसी मशीन होगी जो मंगल के इलाके तक जाकर वापस धरती लौटेगी।
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लॉन्च के बाद क्या बोले वैज्ञानिक
लॉन्च के बाद JAXA ने बताया कि यान से उम्मीद के मुताबिक सिग्नल मिल रहे हैं और वह सामान्य रूप से काम कर रहा है। सुबह के अंधेरे के बावजूद हजारों लोगों ने live stream पर यह लॉन्च देखा।
"हमने पुष्टि कर ली है कि यान स्थिर स्थिति में है। मैं उन सभी का धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने इस प्रोजेक्ट का साथ दिया।"
— यासुहिरो कावाकात्सु, MMX मिशन प्रमुख, JAXA
JAXA की वैज्ञानिक मारी आइदा ने कहा, "मैंने इस दिन का सपना देखा था, इसलिए बेहद खुश हूं। अभी मुझे सच में राहत महसूस हो रही है।" H3 प्रोजेक्ट टीम के मैनेजर माकोतो आरिता ने कहा कि उन्हें खुशी है कि H3 रॉकेट से MMX के ऐतिहासिक मिशन का पहला अध्याय खुल सका। लगातार तीन सफल उड़ानों के बाद H3 रॉकेट की सफलता दर अब 80% हो गई है।
NASA के Science Mission Directorate की प्रमुख निकी फॉक्स ने JAXA की live stream पर अपने संदेश में कहा कि MMX के नमूने आने वाली पीढ़ियों तक Mars system के विज्ञान को बदल देंगे, खासकर तब जब NASA मंगल पर पहले इंसान भेजने की तैयारी कर रहा है।
पूरा सफर: 2026 से 2031 तक
| समय | पड़ाव |
|---|---|
| अक्टूबर 2026 | Tanegashima से H3 रॉकेट पर लॉन्च (20 अक्टूबर) |
| अगस्त 2027 | मंगल की कक्षा में पहुंचना |
| सितंबर 2027 से | Phobos के पास कक्षा, सतह की मैपिंग और उतरने की जगह की तलाश |
| लगभग 3 साल | Phobos पर उतरकर नमूना लेना, IDEFIX rover उतारना, Deimos के पास से गुजरना |
| नवंबर 2030 | मंगल के इलाके से धरती की ओर वापसी शुरू |
| 2031 | नमूनों वाला कैप्सूल ऑस्ट्रेलिया के Woomera में उतरेगा |

Phobos ही क्यों, जवाब सौरमंडल के जन्म में छिपा है
मंगल के दो चांद हैं, Phobos और Deimos। दोनों को अमेरिकी खगोलशास्त्री Asaph Hall ने 1877 में खोजा था। Phobos आलू जैसे आकार की एक ऊबड़-खाबड़ चट्टान है, जिसका आकार करीब 22 किलोमीटर है। वैज्ञानिक अब तक तय नहीं कर पाए हैं कि ये चांद बने कैसे:
- टक्कर वाला सिद्धांत (giant impact): किसी बड़े खगोलीय पिंड की मंगल से टक्कर हुई और उससे उछला मलबा जुड़कर चांद बन गया। ऐसा है तो Phobos की मिट्टी में मंगल के शुरुआती दौर के सुराग भी होंगे।
- पकड़े गए asteroid (capture): ये असल में asteroid हैं, जिन्हें मंगल के गुरुत्वाकर्षण ने अपनी तरफ खींच लिया।
JAXA का कहना है कि सही जवाब मिलने से यह समझने में मदद मिलेगी कि बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल जैसे चट्टानी ग्रहों पर जीवन के अनुकूल माहौल कैसे बना होगा। मिशन यह भी परखेगा कि क्या Phobos को भविष्य में मंगल जाने वाले इंसानी मिशनों के लिए एक 'प्राकृतिक अंतरिक्ष स्टेशन' की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। Phobos का गुरुत्वाकर्षण बहुत कमजोर है, इसलिए वहां उतरने और वहां से उड़ने में मंगल की सतह के मुकाबले बहुत कम ईंधन लगता है।
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मिशन में क्या-क्या है
- तीन हिस्सों वाला यान: propulsion module, exploration module और return module। मंगल तक ले जाने, Phobos पर काम करने और धरती पर लौटने का जिम्मा इन्हीं पर है।
- दो तरह के नमूने: यान Phobos के मंगल की ओर वाले हिस्से से गहराई का नमूना (core sample) और सतह का नमूना, दोनों लेने की कोशिश करेगा।
- IDEFIX rover: फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES और जर्मनी की DLR का बनाया छोटा rover, जिसका नाम कॉमिक 'Asterix' के कुत्ते के नाम पर है। इसे मुख्य यान 40 से 100 मीटर की ऊंचाई से Phobos पर उतारेगा। यह Phobos की सतह पर चलने वाली पहली गाड़ी होगी और यान के उतरने की जगह को सुरक्षित बनाने में मदद करेगी।
- अंतरराष्ट्रीय साझेदारी: मिशन में NASA, ESA, CNES और DLR साझेदार हैं, साथ में कई विश्वविद्यालय और टेक कंपनियां जुड़ी हैं।
- Deimos पर भी नजर: वापसी के रास्ते में यान दूसरे चांद Deimos के पास से गुजरेगा और मंगल को भी observe करेगा।
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Sample return में जापान का पुराना रिकॉर्ड
नमूने लाने के मिशनों में जापान का अनुभव मजबूत रहा है। उसका Hayabusa यान 2010 में asteroid Itokawa से नमूने लेकर लौटा था, जिससे जापान asteroid से नमूने लाने वाला पहला देश बना। इसके बाद Hayabusa2 2020 में asteroid Ryugu की मिट्टी धरती पर लाया। MMX इसी अनुभव को अब मंगल के इलाके तक ले जा रहा है।
भारत के लिए भी यह मिशन अहम संदर्भ रखता है। ISRO का Mangalyaan (Mars Orbiter Mission) 2014 में पहली ही कोशिश में मंगल की कक्षा में पहुंचा था, लेकिन मंगल के इलाके से नमूने लाने का काम अब तक कोई देश नहीं कर पाया है। MMX कामयाब हुआ तो जापान यह करने वाला पहला देश होगा।
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आगे क्या
अगले करीब 10 महीने MMX अंतरिक्ष में मंगल की ओर सफर करेगा। अगस्त 2027 में मंगल की कक्षा में पहुंचने के बाद असली परीक्षा शुरू होगी: बेहद कमजोर गुरुत्वाकर्षण वाले Phobos पर सुरक्षित उतरना, नमूना उठाना और फिर वहां से उड़ान भरना। अगर सब योजना के मुताबिक रहा, तो 2031 में Phobos की मिट्टी धरती की प्रयोगशालाओं में होगी।
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Frequently asked questions
MMX मिशन कब लॉन्च हुआ?
JAXA ने MMX को 20 अक्टूबर 2026 को जापानी समय सुबह 4:41:03 बजे (भारतीय समय रात करीब 1:11 बजे) Tanegashima Space Center से H3 रॉकेट (फ्लाइट नंबर 10) पर लॉन्च किया। करीब 71 मिनट बाद यान रॉकेट से अलग होकर तय कक्षा में पहुंच गया।
MMX का मकसद क्या है?
मंगल के बड़े चांद Phobos से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी धरती पर लाना, ताकि पता चल सके कि मंगल के चांद टक्कर से बने या पकड़े गए asteroid हैं। इससे चट्टानी ग्रहों पर जीवन के अनुकूल माहौल बनने की कहानी समझने में मदद मिलेगी।
MMX मंगल कब पहुंचेगा और कब लौटेगा?
यह अगस्त 2027 में मंगल की कक्षा में पहुंचेगा, करीब तीन साल मंगल के इलाके में काम करेगा, नवंबर 2030 में वापसी शुरू करेगा और 2031 में नमूनों वाला कैप्सूल ऑस्ट्रेलिया के Woomera में उतरेगा।
IDEFIX rover क्या है?
फ्रांस की CNES और जर्मनी की DLR का बनाया छोटा rover, जिसे MMX यान Phobos पर उतारेगा। यह Phobos की सतह पर चलने वाली पहली गाड़ी होगी और मुख्य यान के सुरक्षित उतरने में मदद करेगी।
क्या पहले किसी ने मंगल के इलाके से नमूने लाए हैं?
नहीं। मंगल या उसके चांदों से अब तक कोई नमूना धरती पर नहीं आया है। MMX कामयाब हुआ तो यह ऐसा करने वाला दुनिया का पहला मिशन होगा। जापान इससे पहले Hayabusa (2010, Itokawa) और Hayabusa2 (2020, Ryugu) से asteroid के नमूने ला चुका है।
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