Mohan Bhagwat: विजयादशमी पर बोले RSS प्रमुख- 'सत्ता बदलने से हालात नहीं बदलते', वैश्विक ताकतें भारत को कमजोर करने में जुटीं; OTT पर नियंत्रण की मांग, Kolkata भगदड़ को बताया मानवीय भूल
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर के रेशिमबाग मैदान में विजयादशमी उत्सव में कहा कि सत्ता परिवर्तन से किसी देश के हालात नहीं बदलते। उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश की उथल-पुथल का जिक्र किया और चेताया कि वैश्विक ताकतें भारत, हिंदुओं और संघ को कमजोर करना चाहती हैं। भागवत ने OTT कंटेंट पर नियंत्रण और नशे पर पाबंदी की मांग की, और Kolkata पंडाल भगदड़ को मानवीय भूल बताया। इस कार्यक्रम के साथ संघ का शताब्दी वर्ष पूरा हुआ।

विजयादशमी पर भागवत का बड़ा संदेश: "सत्ता बदलने से हालात नहीं बदलते"
नागपुर, 20 अक्टूबर 2026: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने विजयादशमी पर नागपुर के रेशिमबाग मैदान में संघ के वार्षिक उत्सव को संबोधित किया। भाषण में उन्होंने 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन के जरिए हालात बदलने की सोच को सिरे से खारिज किया। उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया की कुछ ताकतें भारत, हिंदू समाज और खुद संघ को कमजोर करने में लगी हैं।
भागवत ने OTT कंटेंट पर नियंत्रण और नशे पर पाबंदी की मांग की, और Kolkata पंडाल भगदड़ को "मानवीय भूल" बताया। यह कार्यक्रम संघ के शताब्दी वर्ष के समापन का भी था। RSS की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन ही डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी।
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"रिजीम बदलने से स्थिति बदलेगी, ऐसा कभी नहीं हुआ"
भागवत ने कहा कि पश्चिम से उठी एक लहर दुनिया भर में स्थापित व्यवस्थाओं, शिष्टाचार और सांस्कृतिक मूल्यों को चुनौती दे रही है और उन्हें तोड़ना चाहती है। इस संदर्भ में उन्होंने फ्रांस में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों, अल्बानिया के हालात और नेपाल व बांग्लादेश में हुई उथल-पुथल का जिक्र किया।
"देखिए फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है, और नेपाल व बांग्लादेश में क्या हुआ।" — मोहन भागवत
"लोग कहते हैं कि रिजीम बदलने से स्थिति बदल जाएगी। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। न पहले हुआ, न अब होगा।" — मोहन भागवत
उनका संदेश साफ था कि सिर्फ सत्ता में बैठे लोगों को बदल देने से किसी देश की बुनियादी समस्याएं हल नहीं होतीं। भागवत ने यह भी कहा कि विरोध-प्रदर्शनों का मकसद समाधान खोजना होना चाहिए, समाज में दरार पैदा करना नहीं।
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"वैश्विक ताकतें भारत, हिंदुओं और संघ को कमजोर करना चाहती हैं"
संघ प्रमुख ने चेतावनी दी कि दुनिया की कुछ ताकतें भारत, हिंदू समाज और यहां तक कि RSS को भी कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उनके मुताबिक इन कोशिशों को कुछ ऐसे महत्वाकांक्षी नेताओं से भी बल मिल रहा है, जिन्हें देश की भलाई से ज्यादा अपनी सत्ता की चिंता है।
उन्होंने लोगों से 'हम बनाम वे' वाले बंटवारे की सोच को नकारने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और राष्ट्रीय एकता व स्वदेशी के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
OTT पर नियंत्रण और नशे पर पाबंदी की मांग
भागवत ने OTT प्लेटफॉर्म के कंटेंट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवा बिना विवेक के कंटेंट देख और आत्मसात कर रहे हैं, इसलिए OTT कंटेंट को नियंत्रित करने की जरूरत है और सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए।
- नशा: उन्होंने नशे की लत को गंभीर राष्ट्रीय समस्या बताया, जिसका असर व्यक्ति, परिवार और पूरे समाज पर पड़ता है। उन्होंने नशीले पदार्थों पर पाबंदी की मांग की।
- सबकी जिम्मेदारी: भागवत ने कहा कि नशे की रोकथाम में माता-पिता, सरकार, प्रशासन और समाज, सबकी भूमिका है और संघ भी इस मुद्दे पर काम करेगा।
- तकनीक: उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल में विवेक और जिम्मेदारी जरूरी है, और तकनीकी प्रगति के साथ उसके नतीजों की समझ भी होनी चाहिए।
- युवा: उनके मुताबिक नई पीढ़ी का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ, मजबूत और तैयार होना एक सक्षम समाज के लिए जरूरी है।
Kolkata भगदड़ पर: "प्रकृति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता"
भागवत ने अपने भाषण में Kolkata के Chorbagan दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ का भी जिक्र किया, जिसमें 19 लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने इस हादसे के लिए प्रकृति को नहीं, बल्कि मानवीय भूल को जिम्मेदार ठहराया। बारिश शुरू होने पर आयोजकों की एक घोषणा के बाद पंडाल में अफरा-तफरी मच गई थी।
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"विविधता को स्वीकारना और सहेजना भारत की परंपरा"
भागवत ने कहा कि भारत में भूगोल, जाति, भाषा, क्षेत्र और खान-पान की विविधता है, और इस विविधता को स्वीकार करना और उसकी रक्षा करना भारत का पारंपरिक स्वभाव रहा है।
"भारत में तरह-तरह की भौगोलिक विशेषताएं, जातियां, भाषाएं, क्षेत्र और खान-पान हैं। एक होकर आगे बढ़ने के लिए देश को ऐसी बुनियादी मूल्य-व्यवस्था चाहिए जो हर तरह की विविधता का सम्मान करे। दुनिया में ऐसा कोई और वैचारिक ढांचा नहीं है, लेकिन सौभाग्य से भारत को यह प्राचीन परंपरा से मिला है।" — मोहन भागवत
- 'स्व' और संविधान: भागवत ने 'स्वबोध' (अपनी पहचान का बोध) को संविधान की प्रस्तावना के पहले शब्दों "हम, भारत के लोग" से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यही भावनात्मक जुड़ाव प्राचीन काल से इतनी विविधता के बावजूद देश को एक रखता आया है।
- गुलामी का कारण: उन्होंने कहा कि जब-जब समाज ने एकता और अपनेपन का यह भाव भुलाया, लोग आपस में बंटे और कमजोर हुए। उनके मुताबिक इसी आंतरिक कलह के कारण देश को सदियों तक गुलामी झेलनी पड़ी।
- पहचान से ऊपर राष्ट्र: भागवत ने कहा कि अपनी भाषा, जाति या आस्था से लगाव गलत नहीं है, लेकिन जब तक राष्ट्र और साझा राष्ट्रीय पहचान इन सबसे ऊपर रही, भारत पूरी दुनिया के लिए आदर्श बना रहा।
- पंच परिवर्तन: उन्होंने संघ के 'पंच परिवर्तन' का जिक्र करते हुए स्वबोध और स्वदेशी को बुनियादी सिद्धांत बताया।
"दुनिया समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है"
भागवत ने कहा कि अमीर और तकनीकी रूप से उन्नत देश भी पर्यावरण के नुकसान, विविधता को संभालने, कमजोर होते परिवारों और सत्ता के संघर्ष से जूझ रहे हैं।
"दुनिया जानती है कि इन आधुनिक दुविधाओं के जवाब भारत के पास हैं। इसीलिए दुनिया ध्यान से सुन रही है कि भारत क्या कहता है।" — मोहन भागवत
हिमालय पर चेतावनी: उन्होंने संतुलित विकास की बात की, जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण और नैतिक मूल्यों का भी ध्यान रखा जाए। भागवत ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में एकतरफा विकास के कारण ऐसी आपदाएं आईं, जिनका असर पड़ोसी राज्यों और नेपाल से तिब्बत तक फैले इलाकों पर पड़ा।
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हिंदू धर्म को बचाने में संघ की भूमिका, BJP की सफलता का श्रेय
भागवत ने कहा कि हिंदू धर्म को बचाए रखने में संघ ने अहम भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक लगातार सांस्कृतिक और संगठनात्मक प्रयासों की वजह से, खासकर विदेशी आक्रमणों के बाद के दौर में, हिंदू धर्म सदियों तक मजबूत बना रहा। उन्होंने BJP की सफलता का श्रेय भी संघ के अनुशासन और संगठन की ताकत को दिया।
शताब्दी के बाद की प्राथमिकताओं में उन्होंने सामाजिक समरसता, व्यक्ति निर्माण और सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी गिनाईं। उन्होंने कहा कि समाज बदलने के लिए सिर्फ सरकार पर निर्भर रहना ठीक नहीं है।
संत रविदास से ज्योतिबा फुले तक, महापुरुषों को याद किया
भागवत ने इस साल पड़ रही कई महापुरुषों की जयंतियों और पुण्यतिथियों का जिक्र किया:
- संत रविदास (650वीं जयंती वर्ष): उन्होंने विदेशी आक्रमण और उत्पीड़न के दौर में भक्ति, स्वधर्म निष्ठा और सामाजिक समरसता का संदेश फैलाया।
- स्वामी श्रद्धानंद (बलिदान के 100 साल): आर्यसमाजी संन्यासी, शिक्षाविद, शुद्धि आंदोलन के अग्रणी और स्वतंत्रता सेनानी।
- स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती (जन्म शताब्दी): उन्होंने ओडिशा के जनजातीय समुदायों के बीच काम किया।
- महात्मा ज्योतिराव फुले (200वीं जयंती वर्ष): समाज सुधारक, जिनका 200वां जयंती वर्ष 11 अप्रैल से शुरू हुआ।
- श्रीमद् राजनारायण बसु (200वीं जयंती वर्ष): Bengal में स्वदेशी मेलों के जरिए समाज को संगठित करने और स्वाभिमान जगाने वाले।
भागवत ने कहा कि संघ पिछले 100 साल से समाज में इसी 'स्व' के भाव को जगाने और देश को मजबूत व आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहा है।
शस्त्र पूजन, हेडगेवार को श्रद्धांजलि और कौन-कौन पहुंचा
भाषण से पहले भागवत ने परंपरा के मुताबिक शस्त्र पूजन किया और स्मृति मंदिर में संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में संघ प्रार्थना भी हुई।
- मुख्य अतिथि: वरिष्ठ संपादक संजय गुप्ता
- अन्य अतिथि: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और मुंबई में इजराइल के कॉन्सुल जनरल
- संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
क्यों अहम है विजयादशमी का भाषण
सरसंघचालक का विजयादशमी भाषण संघ का साल का सबसे अहम संबोधन माना जाता है। इसमें संघ प्रमुख समाज, शासन और राष्ट्रीय जीवन से जुड़े मुद्दों पर संगठन की सोच रखते हैं, जिसे आगे के एजेंडे का संकेत माना जाता है। इस बार का भाषण इसलिए भी खास था क्योंकि इसके साथ संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम पूरे हुए और संघ अपनी दूसरी शताब्दी में दाखिल हुआ।
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Frequently asked questions
मोहन भागवत ने रिजीम चेंज पर क्या कहा?
भागवत ने कहा, 'लोग कहते हैं कि रिजीम बदलने से स्थिति बदल जाएगी। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। न पहले हुआ, न अब होगा।' उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश के हालात का जिक्र किया।
भागवत ने OTT के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि युवा बिना विवेक के OTT कंटेंट देख रहे हैं, इसलिए इसे नियंत्रित करने की जरूरत है और सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए। उन्होंने नशे पर पाबंदी की भी मांग की।
Kolkata भगदड़ पर भागवत ने क्या कहा?
भागवत ने Chorbagan दुर्गा पूजा पंडाल में 19 लोगों की मौत वाली भगदड़ को प्रकृति की नहीं, मानवीय भूल बताया।
RSS विजयादशमी उत्सव 2026 के मुख्य अतिथि कौन थे?
मुख्य अतिथि वरिष्ठ संपादक संजय गुप्ता थे। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, CM देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे।
RSS की स्थापना कब हुई थी?
RSS की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में की थी। 20 अक्टूबर 2026 के उत्सव के साथ संघ का शताब्दी वर्ष पूरा हुआ।
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