UP Chunav 2027: हत्या में उम्रकैद पाए Babloo Rai की सजा पर Allahabad HC की रोक, BJP टिकट पर चुनाव लड़ने की जताई थी इच्छा; कोर्ट बोला- आम आदमी की आजीविका नेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम नहीं
Allahabad High Court ने 2017 के हत्याकांड में उम्रकैद पाए Varanasi के Nandlal Rai उर्फ Babloo Rai की दोषसिद्धि और सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगाकर जमानत दे दी है। Rai ने 2027 का UP विधानसभा चुनाव निर्दलीय या BJP टिकट पर लड़ने की इच्छा जताई थी। Conviction पर रोक से उन पर चुनाव लड़ने की अयोग्यता फिलहाल लागू नहीं होगी। साथ में, वोटर लिस्ट से duplicate नाम हटाने का सख्त आदेश और SP का 26 नवंबर को घोषणापत्र।

हत्या में उम्रकैद, फिर भी लड़ सकेंगे चुनाव: HC ने सजा पर लगाई रोक
प्रयागराज, 19 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले Allahabad High Court का एक आदेश सुर्खियों में है। हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए Varanasi के Nandlal Rai उर्फ Babloo Rai की दोषसिद्धि (conviction) और सजा, दोनों पर रोक लगा दी है और उन्हें जमानत दे दी है। Rai ने अदालत से कहा था कि वे 2027 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय या, अगर संभव हुआ तो, BJP के टिकट पर लड़ना चाहते हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में अहम टिप्पणी की: "आम आदमी की आजीविका का अधिकार किसी नेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है।"
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कोर्ट ने क्या कहा
बेंच ने अपने 3 पन्नों के आदेश में कहा:
"आम आदमी के आजीविका के अधिकार को देखते हुए, जो किसी नेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है, अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि वह अपनी अपील पर अंतिम फैसले की सुनवाई तक जीवित रह सके।" — Allahabad High Court
- Supreme Court का हवाला: हाईकोर्ट ने Afzal Ansari बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में Supreme Court के फैसले का जिक्र किया, जिसमें शीर्ष अदालत ने कई जनप्रतिनिधियों की दोषसिद्धि पर रोक लगाई थी। उस फैसले में कहा गया था कि नेताओं की अपने मतदाताओं के प्रति खास जिम्मेदारी होती है और दोषसिद्धि पर रोक न मिलने से चुनाव लड़ने का मौका हमेशा के लिए छिन सकता है।
- धारा 389(1) CrPC: कोर्ट ने कहा कि दोषसिद्धि पर रोक का फैसला मामले की "खास परिस्थितियों" को देखकर होना चाहिए, खासकर तब, जब रोक न लगाने से "अन्याय या ऐसे नतीजे हों जिन्हें पलटा न जा सके।"
- अपील जल्द सुनवाई में नहीं: आदेश में दर्ज है कि 2026 में दायर यह अपील निकट भविष्य में सुनवाई के लिए आने की संभावना नहीं है।
कौन हैं Babloo Rai, क्या है मामला
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अपीलकर्ता | Nandlal Rai उर्फ Babloo Rai, Varanasi |
| मामला | 2017 का हत्याकांड, Varanasi का Sigra थाना |
| मृतक | Pramod Kumar Nigam, शिकायतकर्ता के पिता; Ram Janmabhoomi आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े बताए गए |
| आरोप | बाजार से घर लौटते समय शाम करीब 7:30 बजे गोली मारकर हत्या |
| धाराएं | IPC की धारा 302 (हत्या) और 34 |
| ट्रायल कोर्ट का फैसला | Varanasi कोर्ट, 15 अप्रैल 2025: उम्रकैद |
| हाईकोर्ट में अपील | Criminal Appeal No. 1244 of 2026 |
| हाईकोर्ट का आदेश | 5 अक्टूबर 2026: दोषसिद्धि और सजा पर रोक, जमानत |
Rai का दावा है कि वे एक राजनीतिक व्यक्ति हैं और दोषसिद्धि से पहले BJP के सक्रिय कार्यकर्ता थे।
बचाव पक्ष की दलीलें
Rai के वकीलों Devendra Deo Gupta और P.K. Singh ने कोर्ट में ये दलीलें रखीं:
- FIR में Rai का नाम नहीं था; उनकी कथित भूमिका FIR दर्ज होने के करीब 17 दिन बाद एक disclosure के आधार पर सामने आई।
- Disclosure के गवाह संदिग्ध हैं; अभियोजन के एक गवाह (PW-6) ने जिरह में माना कि उसने घटना देखी ही नहीं।
- सह-आरोपी Sheshnath Sharma से पिस्तौल की बरामदगी "फर्जी और प्लांट की हुई" है।
- मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य सबूतों पर टिका है और परिस्थितियों की कड़ी पूरी नहीं है।
- Rai को सिर्फ शक के आधार पर फंसाया गया, जबकि मृतक खुद राजनीतिक रूप से सक्रिय थे।
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध किया, लेकिन आदेश के मुताबिक Additional Government Advocate बचाव पक्ष की दलीलों का खंडन नहीं कर सके। ध्यान रहे, ये अपीलकर्ता की दलीलें हैं; हाईकोर्ट ने इन्हें अपने निष्कर्ष के रूप में स्वीकार नहीं किया है और अपील पर फैसला अभी बाकी है।
जमानत की शर्तें
- निजी मुचलका और दो जमानतदार।
- जमानत के दौरान कोर्ट की इजाजत के बिना अपने नाम की कोई अचल संपत्ति बेच, ट्रांसफर या गिरवी नहीं रख सकेंगे।
- पता बदलने पर 10 दिन के भीतर सूचना देनी होगी, वरना राज्य जमानत रद्द कराने की मांग कर सकता है।
- रिहाई के एक महीने के भीतर जुर्माने का 50% जमा करना होगा; बाकी 50% अपील लंबित रहने तक स्थगित रहेगा।
- हाईकोर्ट ने दफ्तर को छह हफ्ते में paper book तैयार करने और अपील को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

चुनाव लड़ने के लिए conviction पर रोक क्यों जरूरी
यही इस आदेश का सबसे अहम राजनीतिक पहलू है:
- कानून: Representation of the People Act, 1951 की धारा 8(3) के तहत दो साल या उससे ज्यादा की सजा पाने वाला व्यक्ति सजा की अवधि और रिहाई के बाद छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता।
- Lily Thomas फैसला (2013): Supreme Court ने कहा था कि दोषी ठहराया गया जनप्रतिनिधि दोषसिद्धि की तारीख से ही अयोग्य हो जाता है।
- जमानत काफी नहीं: सिर्फ जमानत या सजा निलंबित होने से यह रोक नहीं हटती; केवल दोषसिद्धि पर रोक (stay of conviction) ही चुनाव लड़ने का रास्ता खोलती है। इसीलिए नेता अक्सर अपील के दौरान conviction पर रोक की मांग करते हैं।
इस आदेश को खास बनाने वाली बात यह है कि Rai कोई मौजूदा विधायक या सांसद नहीं हैं। कोर्ट ने जनप्रतिनिधियों वाले Supreme Court के तर्क को एक आम व्यक्ति के आजीविका के अधिकार से जोड़कर राहत दी। आदेश यह तय नहीं करता कि Rai चुनाव लड़ेंगे या उन्हें किसी पार्टी का टिकट मिलेगा।
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UP चुनाव 2027: आज की बाकी बड़ी हलचल
- वोटर लिस्ट से डुप्लिकेट नाम हटाने का सख्त आदेश: UP के मुख्य निर्वाचन अधिकारी Navdeep Rinwa ने सोमवार को जिला निर्वाचन अधिकारियों और ERO के साथ वर्चुअल बैठक में मतदाता सूचियों से दोहरी प्रविष्टियां (duplicate entries) प्राथमिकता से हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, "किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई होगी।" 24 अक्टूबर को विशेष अभियान दिवस होगा और 12 नवंबर 2026 को मसौदा मतदाता सूची (draft roll) प्रकाशित होनी है।
- Akhilesh Yadav का आरोप: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने आरोप लगाया कि UP की वोटर लिस्ट में एक महिला के नाम पर कई प्रविष्टियां दर्ज हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय पहले ही X पर मान चुका है कि SIR के बाद भी सूची में duplicate entries हैं और उन्हें हटाने का काम चल रहा है, हालांकि उसने इनकी संख्या लाखों में होने के दावे से इनकार किया।
- SP का घोषणापत्र 26 नवंबर को: Akhilesh Yadav ने ऐलान किया है कि पार्टी 2027 चुनाव के लिए अपना 'जन-मन घोषणापत्र' संविधान दिवस, 26 नवंबर को जारी करेगी।
- Owaisi की नई चाल: AIMIM प्रमुख Asaduddin Owaisi ने मुस्लिम युवाओं से राजनीतिक परिवारों के पीछे चलने के बजाय खुद नेतृत्व संभालने की अपील की और कहा कि AIMIM किसी Nehru, Gandhi या Yadav को अपना नेता नहीं बनाएगी। SP और Congress ने इस पर पलटवार किया है।
- Mayawati सक्रिय: BSP प्रमुख Mayawati ने कार्यकर्ताओं से 2027 के चुनाव की तैयारी में जुटने को कहा है।
आगे क्या
- Rai की अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई paper book तैयार होने के बाद होगी; तब तक दोषसिद्धि पर रोक जारी रहेगी।
- राज्य सरकार चाहे तो इस आदेश को Supreme Court में चुनौती दे सकती है।
- चुनाव लड़ने के लिए Rai को नामांकन के समय अपने आपराधिक मामले और सजा की पूरी जानकारी हलफनामे में देनी होगी।
- UP में 2027 के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है; मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 2027 की पहली छमाही में खत्म हो रहा है।
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Frequently asked questions
Allahabad High Court ने Babloo Rai मामले में क्या आदेश दिया?
Justice Siddharth और Justice Vinai Kumar Dwivedi की बेंच ने 5 अक्टूबर 2026 को 2017 के हत्याकांड में उम्रकैद पाए Nandlal Rai उर्फ Babloo Rai की दोषसिद्धि और सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगाई और उन्हें जमानत दी।
कोर्ट ने यह आदेश किस आधार पर दिया?
कोर्ट ने कहा कि आम आदमी का आजीविका का अधिकार किसी नेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है। उसने Supreme Court के Afzal Ansari फैसले का हवाला दिया और माना कि अपील जल्द सुनवाई में आने की संभावना नहीं है।
क्या अब Babloo Rai चुनाव लड़ सकते हैं?
Representation of the People Act की धारा 8(3) के तहत दो साल या ज्यादा की सजा वाला व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगने से यह अयोग्यता फिलहाल लागू नहीं होगी। आदेश यह तय नहीं करता कि वे चुनाव लड़ेंगे या उन्हें टिकट मिलेगा।
जमानत की शर्तें क्या हैं?
दो जमानतदार, कोर्ट की इजाजत के बिना अचल संपत्ति बेचने या ट्रांसफर करने पर रोक, पता बदलने पर 10 दिन में सूचना और रिहाई के एक महीने में जुर्माने का 50% जमा करना।
UP में मसौदा मतदाता सूची कब आएगी?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक मसौदा मतदाता सूची 12 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी। उससे पहले 24 अक्टूबर को विशेष अभियान दिवस होगा और duplicate entries हटाने का काम प्राथमिकता से चल रहा है।
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