CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका 7 दिन बाद तिहाड़ से रिहा, 'Jantar Mantar पर प्रदर्शन की अपील नहीं करेंगे' का लिखित वादा; ₹50,000 के bond, 23 अक्टूबर को अगली सुनवाई
Cockroach Janta Party के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका बुधवार शाम तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। SEM ऋतु राज ने ₹50,000 के personal और surety bond तथा इस लिखित वादे पर रिहाई दी कि जब तक Jantar Mantar denotified है, वे वहां प्रदर्शन की अपील नहीं करेंगे। पुलिस ने तीन दिन और हिरासत मांगी थी। इससे पहले High Court ने दखल से इनकार किया था। अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी।

7 दिन बाद तिहाड़ से बाहर आए CJP के दोनों नेता
नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: Cockroach Janta Party (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद बुधवार शाम तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। Special Executive Magistrate (SEM) ऋतु राज ने दोनों की रिहाई का आदेश तब दिया, जब उन्होंने लिखित वादा किया कि जब तक Jantar Mantar denotified रहेगा, वे वहां प्रदर्शन की कोई अपील नहीं करेंगे। जेल से बाहर आते वक्त दोनों के हाथ में तिरंगा था।
दोनों को ₹50,000-₹50,000 का personal bond और इतनी ही राशि का surety bond भरना पड़ा, जो जांच पूरी होने तक लागू रहेगा। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे होगी, जिसमें दोनों नेताओं और उनके जमानतियों को मौजूद रहना होगा।
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लिखित वादे में क्या लिखा
दोनों नेताओं ने अलग-अलग undertaking में शांति भंग न करने और SEM court समेत न्यायपालिका पर भरोसा जताने की बात लिखी। Undertaking में कहा गया:
"हम Jantar Mantar पर प्रदर्शन की कोई अपील तब तक नहीं करेंगे, जब तक इसे कानून के मुताबिक denotify नहीं कर दिया जाता। हम दोहराते हैं कि हमारा कोई भी प्रदर्शन संविधान के दायरे में ही होगा।"
— सौरव दास और आशुतोष रांका की undertaking
कोर्ट में पुलिस और बचाव पक्ष की दलीलें
- पुलिस की मांग: जांच अधिकारी ने तीन दिन और न्यायिक हिरासत मांगी। अभियोजन की ओर से वकील भैरव दास और प्रशांत प्रकाश ने दलील दी कि दोनों के पुराने व्यवहार और media में दिए बयानों को देखते हुए शांति भंग होने की आशंका बनी हुई है, और कोर्ट तथा media में दिए उनके बयान 'विरोधाभासी' हैं।
- CJP सदस्य का बयान: पुलिस ने यह भी कहा कि पिछली सुनवाई के बाद जब दोनों को तिहाड़ ले जाया जा रहा था, तब CJP के एक अन्य सदस्य ने media में ऐसा बयान दिया जिससे SEM court की गरिमा को ठेस पहुंची।
- बचाव पक्ष: वकील अभिक चिमनी और प्रांजल अबरोल ने इसके लिए बिना शर्त माफी मांगी और भरोसा दिया कि ऐसा दोबारा नहीं होगा।
- शर्तें: दोनों को हर सुनवाई में पेश होना होगा और bond की शर्तें माननी होंगी। जांच अधिकारी अगली सुनवाई में जमानतियों की verification report देंगे।
High Court ने दखल देने से किया था इनकार
रिहाई से पहले बुधवार को ही दोनों नेताओं ने Delhi High Court से वह याचिका वापस ले ली, जिसमें उन्होंने 19 अक्टूबर को हिरासत बढ़ाने के SEM के आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद की बेंच ने कहा कि दोनों के पास appellate court जाने का विकल्प है और SEM के सामने सुनवाई का नतीजा अभी आना बाकी है। बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि 10 अक्टूबर को भरा गया peace bond अगले ही दिन, 11 अक्टूबर को टूट गया था। Barricade तोड़कर Jantar Mantar में घुसने पर जज ने कहा कि ऐसे में 10-20 और लोगों के नियम तोड़ने की आशंका रहती है और पुलिस की इजाजत का मकसद अनचाहे तत्वों को भीड़ में शामिल होने से रोकना भी है।
CJP की legal head रत्ना सिंह ने कहा कि High Court की बातें मौखिक टिप्पणियां थीं, मामले के merits पर कोई बहस नहीं हुई, और पार्टी उनसे जरूरी नहीं कि सहमत हो।

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अब तक क्या-क्या हुआ
- 13 अक्टूबर: दोनों नेता CEC ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान barricade लगे Jantar Mantar परिसर के gate पर चढ़कर अंदर जाने की कोशिश के आरोप में हिरासत में लिए गए।
- 14 अक्टूबर: Parliament Street पुलिस की preventive कार्यवाही में SEM ने दोनों को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
- 19 अक्टूबर: हिरासत दो दिन बढ़ी। SEM ने पहले पेश किए गए जमानतियों को पहचान में गड़बड़ी और उनकी क्षमता पर शक के आधार पर खारिज कर दिया था।
- 21 अक्टूबर: High Court से याचिका वापस, शाम को SEM का रिहाई आदेश और तिहाड़ से रिहाई।
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किसने क्या कहा
"सौरव और आशु मुझसे बेहतर ही नहीं, मुझसे बहुत-बहुत बड़े नेता हैं। आपके आदेश मानकर खुशी होगी, मेरे नेताओ। जान हाजिर है। लेकिन इसके बाद मेरे बिना garden में कोई अकेला नहीं घूमेगा!!!"
— अभिजीत दिपके, CJP संस्थापक (X पर)
- रत्ना सिंह (CJP legal head): "हम फैसले का स्वागत करते हैं। यह फैसला बहुत पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी भी देर नहीं हुई है।" उन्होंने कहा कि पुलिस ने 'तत्काल खतरे' के आधार पर हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, जबकि प्रदर्शन की कोई अपील ही नहीं थी।
- अरविंद केजरीवाल (AAP): रिहाई के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि पूरा देश दोनों के साथ खड़ा है।
- संबित पात्रा (BJP): BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि दोनों की न्यायिक हिरासत peace bond तोड़ने की वजह से थी, तिरंगा फहराने की कोशिश के लिए नहीं।
- के. अन्नामलाई: तमिलनाडु BJP के पूर्व अध्यक्ष, जिन्होंने 5 जून 2026 को पार्टी छोड़ दी थी, ने X पर लिखा कि लोकतंत्र में सवाल पूछने पर 'foreign agent' का ठप्पा लगा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वे CJP के तरीकों से सहमत नहीं हैं, लेकिन उसके विरोध के अधिकार के साथ हैं। उन्होंने Jantar Mantar को denotify करने, पुलिस अधिकारियों के SEM के तौर पर अधिकार और आठ जमानतियों के खारिज होने पर केंद्र से पांच सवाल पूछे। BJP तमिलनाडु के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने के बाद अन्नामलाई ने SIR पर अपना रुख बदल लिया है।
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Bikaner House में प्रदर्शनों की तस्वीरें हटीं, रैहान वाड्रा का आरोप
इसी बीच Congress नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे, photographer और curator रैहान वाड्रा ने आरोप लगाया कि Bikaner House प्रशासन ने उनकी प्रदर्शनी 'No Idea Is Final' से दिल्ली में हाल के प्रदर्शनों की तस्वीरें हटवा दीं। रैहान के मुताबिक उन्हें बुधवार दोपहर 3:30 बजे लिखित आपत्ति भेजी गई और 105 में से 74 तस्वीरें हटाने या बदलने को कहा गया, वरना शो रद्द करने की बात कही गई। उनका कहना है कि प्रशासन ने 'समय और संदर्भ' को अनुचित बताया, और तिरंगे वाली तस्वीरें भी हटाने को कहा गया। खाली frames लगाने पर भी आपत्ति की गई।

"कला पर कोई भी पाबंदी मेरी राय में गलत और बेकार है। चाहे कितनी भी पाबंदियां लगा दी जाएं, कला लोगों तक पहुंचने का रास्ता ढूंढ ही लेगी।"
— रैहान वाड्रा
प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस कदम को 'हास्यास्पद' बताया और कहा कि देशभर में युवाओं की आवाज दबाई जा रही है। Bikaner House प्रशासन की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रैहान के मुताबिक प्रदर्शनी गुरुवार से रविवार तक चलेगी, और फिलहाल करीब 35-40 तस्वीरें ही दीवारों पर बची हैं।
आगे क्या
- 23 अक्टूबर, दोपहर 3 बजे: SEM के सामने अगली सुनवाई, जमानतियों की verification report पेश होगी।
- AISA अध्यक्ष नेहा बोरा: peace bond भरने के SEM के notice के खिलाफ उनकी याचिका पर Delhi High Court में आज, 22 अक्टूबर को सुनवाई होनी है।
- Jantar Mantar फिलहाल denotified है, यानी वहां प्रदर्शन की इजाजत नहीं है।
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Frequently asked questions
सौरव दास और आशुतोष रांका को कब और कैसे रिहा किया गया?
21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को Special Executive Magistrate ऋतु राज ने दोनों की रिहाई का आदेश दिया। दोनों ने ₹50,000 के personal bond और surety bond भरे और लिखित वादा किया कि Jantar Mantar denotified रहने तक वे वहां प्रदर्शन की अपील नहीं करेंगे। इसके बाद शाम को वे तिहाड़ जेल से बाहर आए।
दोनों को हिरासत में क्यों लिया गया था?
13 अक्टूबर को CEC और SIR के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान barricade वाले Jantar Mantar परिसर में gate पर चढ़कर घुसने की कोशिश के आरोप में उन्हें हिरासत में लिया गया। 14 अक्टूबर को preventive कार्यवाही में 5 दिन की न्यायिक हिरासत मिली, जो 19 अक्टूबर को 2 दिन बढ़ाई गई। आरोप है कि 10 अक्टूबर को भरा peace bond 11 अक्टूबर को टूट गया था।
High Court ने क्या कहा?
जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद की बेंच ने दखल देने से इनकार किया और कहा कि appellate court का विकल्प मौजूद है तथा SEM के फैसले का इंतजार करना चाहिए। इसके बाद दोनों ने याचिका वापस ले ली।
क्या अब CJP Jantar Mantar पर प्रदर्शन कर सकती है?
नहीं। Jantar Mantar फिलहाल denotified है। सौरव दास और आशुतोष रांका ने लिखित वादा किया है कि जब तक इसे कानून के मुताबिक denotify नहीं किया जाता, वे वहां प्रदर्शन की अपील नहीं करेंगे और उनका कोई भी प्रदर्शन संविधान के दायरे में होगा।
रैहान वाड्रा की प्रदर्शनी का मामला क्या है?
प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रैहान वाड्रा का आरोप है कि Bikaner House प्रशासन ने उनकी प्रदर्शनी 'No Idea Is Final' की 105 में से 74 तस्वीरें, जिनमें ज्यादातर दिल्ली के हालिया प्रदर्शनों की थीं, हटाने या बदलने को कहा। Bikaner House की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
Sources
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